कहीं आपका भी पैसा PF,LIC में तो बेकार नहीं पड़ा है


आपके पैसे पर पहला हक आपका होना चाहिए
एक अनुमान के मुताबिक,  PF में 26 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा,  PPF में 20 हजार करोड़ से अधिक,  LIC में करीब 5 हजार 800 करोड़,  बैंक FD में 5 हजार करोड़ से अधिक, डिबेंचर्स-डिविडेंड्स-डिपॉजिट्स में करीब साढ़े तीन हजार करोड़, इंदिरा विकास पत्र में करीब 900 करोड़ जबकि म्युचुअल फंड में साढ़े सात सौ करोड़ रुपए से अधिक ऐसे पैसे पड़े हैं जिसका कोई दावेदार नहीं है।
छोटे-मोटे स्मॉल सेविंग्स में पड़ी निष्क्रिय रकम को भी इसमें जोड़ दें तो करीब 65 हजार करोड़ रुपए अलग-अलग निवेश इंस्ट्रूमेंट में पड़े हैं। अगर इस पर सिर्फ ब्याज की बात करें तो निवेशकों को साल में साढ़े पांच हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या आपकी जी-तोड़ मेहनत की कमाई भी तो कहीं इनमें यूं ही निष्क्रिय नहीं पड़ा है। अगर ऐसा है तो इन पैसों को निकालने में हीं फायदा है। अभी आपको
पैसे की जरूरत होगी, तो क्यों ना, यहां बेकार पड़े पैसों को निकालकर कोई जरूरत पूरी कर ली जाए।
EPFO यानी  Employee Provident Fund Organisation के पास करीब 26 हजार करोड़ रुपए का पीएफ अकाउंट निष्क्रिय पड़ा है यानी अबतक इस पर किसी ने दावा नहीं किया है।  इसमें से ज्यादातर अकाउंट वैसे हैं जिसमें नौकरी बदलने के बाद लोगों ने पुराने अकाउंट का ट्रांसफर नए अकाउंट में नहीं किया है। अगर लगातार तीन साल तक इन अकाउंट में कुछ जमा नहीं किया गया है, तो उसे निष्क्रिय अकाउंट मान लिया जाता है। 2011 में बने कानून के मुताबिक, निष्क्रिय अकाउंट पर कोई भी ब्याज नहीं मिलता है। अगर 8.75%  सालाना ब्याज की बात करें तो इन पैसों पर निवेशकों को दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा है। तो, अगर आपके भी पैसे PF अकाउंट में पड़ा हो, तो अपने पूर्व नियोक्ता ( Employer)या पीएफ ऑफिस से बात करके अपना पैसा जरूर निकाल लें। आप अपनी मेहनत के पैसे पर भला किसी दूसरे का अधिकार कैसे होने देना पसंद करेंगे।
हो सकता है आपका कुछ पैसा कंपनियों, बैंक, म्युचअल फंड में काफी लंबे अर्से से निष्क्रिय पड़ा हो, या फिर आप उसे निकालना भूल गए हों। आपको बता दें कि अगर यहां पर लगातार 7 साल तक पैसे बिना किसी दावे के पड़े रहते हैं, तो उसे मार्केट रेगुलेटर सेबी के Investor Education & Protection Fund में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
इन जगहों पर निष्क्रिय पड़े अपने पैसों को निकालने के लिए आप कंपनी, रजिस्ट्रार, फंड हाउस या बैंक से बात कर सकते हैं। आखिर, आप अपने पैसों से भला दूसरे का फायदा होते कैसे देख सकते हैं। इसके लिए पहले आप अपना एड्रेस अपडेट कराएं और फिर वहां KYC यानी नो योर कस्टमर डॉक्यूमेंट जमा कराएं।
बैंक रेगुलेटर RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी 10 साल या उससे अधिक के बिना दावे वाले पैसों को ट्रांसफर करने के लिए Depositor Education & Awareness Fund (DEAF)की स्थापना की है। लेकिन, इस फंड में पैसा ट्रांसफर होने के बाद भी आप अपना पैसा निकाल सकते हैं। बैंक को अपना  ID प्रूफ दिखाकर आप अपना पैसा वापस पा सकते हैं, वो भी ब्याज के साथ।  
बात अगर इंश्योरेंस की करें तो, इंश्योरेंस रेगुलेटर बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण यानी IRDA (Insurance Regulatory & Development Authirity) ने पॉलिसीहोल्डर के पैसे वापस दिलाने के लिए गाइडलाइंस जारी की है। इसके तहत अगर आपका पैसा किसी बीमा कंपनी के पास निष्क्रिय पड़ा हो, तो संबंधित कंपनी की वेबसाइट पर जाकर इसका पता कर सकते हैं। वहां पर नाम, जन्म तिथि, पैन या पॉलिसी नंबर देकर आपको आपकी पॉलिसी के बारे में  आपको पूरी जानकारी मिल सकती है।
पैसा आखिर आपका है तो उस पर पहला हक भी आपका होना चाहिए, किसी और का नहीं।

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