क्या करें अगर डीमैट अकाउंट होल्डर की मौत हो जाए

जो लोग शेयर बाजार में पैसे लगाते हैं उनके काम की चीज है डीमैट अकाउंट। डीमैंट अकाउंट बैंक अकाउंट की तरह ही है जिसमें पैसों की जगह सिक्योरिटीज, शेयर्स, डिबेंचर्स बगैरह इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रखे जाते हैं। निवेशक अपने नाम से या फिर संयुक्त नाम से डीमैट अकाउंट खोल सकते हैं।

डीमैट अकाउंट से जुड़े एक महत्वपूर्ण सवाल है कि अगर डीमैट अकाउंट होल्डर की मौत हो जाए तो फिर उसके अकाउंट में पड़े सिक्योरिटीज, शेयर्स या डिबेंचर्स बगैरह का ट्रांसफर करने के क्या-क्या उपाय या नियम हैं।

मौजूदा नियम के मुताबिक, ऐसी स्थिति में डीमैट अकाउंट के ज्वाइंट होल्डर या नॉमिनी या कानूनी वारिस (उत्तराधिकारी) जरूरी दस्तावेजों के साथ डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (डीपी) से संपर्क करें, तो मामला सुलझ जाएगा। लेकिन, अगर सिक्योरिटीज इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में ना होकर फिजीकल फॉर्म में हो, तो ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनियों से संपर्क करना सही होगा।

-डीमैट अकाउंट होल्डर ने अगर किसी को नॉमिनी बनाया हो: अगर किसी अकाउंट होल्डर ने अपना नॉमिनी बना रखा हो, तो ऐसी स्थिति में उसकी मौत के बाद सिक्योरिटीज का ट्रांसफर उसके नॉमिनी के नाम पर आसानी से हो जाता है।

इसके लिए नॉमिनी को ट्रांसमिशन फॉर्म भरना होगा, जिसे वो डिपोजिटरी पार्टिसिपेंट्स (डीपी) के यहां से हासिल कर सकता है या फिर उसकी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकता है। ट्रांसमिशन फॉर्म के अलावा डीमैट अकाउंट होल्डर का किसी गैजेटेड अधिकारी या नोटेरी पब्लिक द्वारा अटेस्टेड डेथ सर्टिफिकेट डीपी को
के पास जमा करना होगा। डीपी नॉमिनी द्वारा दी गई जानकारी की जांच करेगा। अगर, सभी जानकारी सही रही, तो फिर नॉमिनी के खाते में डीमैट अकाउंट होल्डर का सिक्योरिटीज, शेयर्स बगैरह जो भी हो, ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

-अगर कोई नॉमिनी ना हो: अकाउंट होल्डर ने अगर किसी को नॉमिनी नहीं बनाया हो, तो उसके डीमैट अकाउंट से सिक्योरिटीज, शेयर्स बगैरह ट्रांसफर करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में सक्षम कोर्ट द्वारा अकाउंट होल्डर का तय किया गया वारिस या उत्तराधिकारी के अकाउंट में उस व्यक्ति का सिक्योरिटीज, शेयर्स,
डिबेंचर्स बगैरह ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके लिए योग्य नॉमिनी को ट्रांसमिशन फॉर्म, डीमैट अकाउंट होल्डर अटेस्टेड डेथ सर्टिफिकेट, प्रेसक्राइव्ड फॉर्म में एफिडेविट, और सभी कानून उत्तराधिकारियों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट ( NOC), जिनको सिक्योरिटीज बगैरह के ट्रांसफर पर आपत्ति ना हो, डीपी के पास जमा करना होगा।  

-अगर संयुक्त नाम से डीमैट अकाउंट हो: ऐसी स्थिति में जीवित बचे अकाउंट होल्डर के नाम से खोले गए अकाउंट में मर चुके अकाउंट होल्डर का सिक्योरिटीज, शेयर, डिबेंचर्स बगैरह ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसके लिए जीवित बचे अकाउंट होल्डर को ट्रांसमिशन फॉर्म भरना होगा और मर चुके अकाउंट होल्डर का अटेस्टेड डेथ सर्टिफिकेट की कॉपी डीपी के पास जमा करना होगा। इसके अलावा, जीवित अकाउंट होल्डर को अलग से डीमैट अकाउंट खोलना होगा, जिसमें नाम वैसा ही रहना चाहिए, जैसा कि संयुक्त डीमैट अकाउंट में था।

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