शेयर बाजार के निवेशकों के लिए कंपनियों के नतीजे के मायने -भाग-2

कंपनियों के नतीजे को सिर्फ आंकड़ा ना समझें निवेशक-भाग-2

कंपनियों की तिमाही नतीजे की अहमियत तो आपने पहले भाग में समझ गए होंगे, तो अब सवाल उठता है कि कंपनियों के नतीजों में क्या देखा जाए या उनमें दी गई जानकारी का निवेशक अपने लिए कैसे फायदा उठा सकते हैं।

नतीजों में क्या देखें: 
-सेवाओं या उत्पादों से आय: कुल बिक्री से होने वाली आय (Income from Total Sale) का पता चलता है। यहां आपको मिलेगी कम्पनी द्वारा दी गई तिमाही में की गई माल अथवा सेवाओं की बिक्री की रकम। कम्पनी कितनी गति से बढ़ (Growth कर)  रही है यह इसी का सूचक है। इसके जरिए आप कंपनी की पिछले साल की समान तिमाही की आय या फिर पिछली तिमाही की आय से मौजूदा तिमाही की आय की तुलना कर किसी शेयर के बारे में फैसला कर सकते हैं।

-लागत (Cost): अधिकतर इस जगह मद होती है कुल क्रय लागत: यहां आपको मिलेगी कच्चे माल अथवा सेवाओं की आपूर्ति पर खर्च की गयी रकम। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि लागत की रकम यदि बिक्री की रकम के मुकाबले कम अनुपात में बढ़ती है तो यह कम्पनी के सेहत के लिये अच्छा है।

-कुल मुनाफा (Gross Profit): कुल लाभ बिक्री और क्रय ( खरीदी) का अन्तर है।

-  प्रभावित खर्चे (Operating Expenses): यहां कच्चे माल के अलावा माल अथवा सेवाओं के उत्पादन पर किये गये अन्य सभी खर्चे लिये जाते हैं। ध्यान रहे कि यह खर्चे जरूरी नहीं कि माल के उत्पाद के अनुपात में ही बढ़ें। क्योंकि कुछ खर्चे जैसे कि बिल्डिंग का किराया या स्टाफ की तनख्वाह का माल के उत्पाद से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। यहां आने वाले मद इस पर भी निर्भर करते हैं कि कम्पनी किस क्षेत्र में कार्यरत है।

-ब्याज एवं अवमूल्यन (Interest and Depreciation):  इन खर्चों का उत्पादन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता इसलिये इन्हे अलग से गिना जाता है। आयकर की गणना में भी इनका अलग से महत्व है। ब्याज उधार ली गई पूंजी पर दिया जाता है। बड़ी पूंजीगत कम्पनियां जहां बड़ी रकम उधार की पूंजी से लगी होती है वहां इस मद का महत्व बढ़ जाता है और ब्याज की दरों में परिवर्तन कम्पनी के लाभ पर असरदारकारक हो सकता है। यहीं यह भी देखने वाली बात है कि जैसे जैसे कम्पनी अधिक लाभ कमा कर उधार चुकता करती जाती है ब्याज की रकम कम होती जाती है और लाभ बढ़ते जाते हैं। अवमूल्यन वास्तव में एक काल्पनिक खर्चा है और कम्पनी इसकी अदायगी नहीं करती।

-अन्य आय (Other Income) : ध्यान रहे की छोटी और महत्वहीन सी यह रकम आपको बहुत बड़ा धोखा दे सकती है। कभी कभी कम्पनी अपने किसी पुराने निवेश, प्लांट अथवा सम्पत्ति को बेच कर मोटी रकम इस मद में कमा लेती है मगर इस मद में आई बढ़ोतरी वास्तव में कम्पनी की आय में स्थायी बढ़ोतरी नहीं करती। कई बार शुद्ध आय में असाधारण बढ़ोतरी देख कर आनन फानन में कोई शेयर खरीद लिया जाता है मगर यह जरूर जांच लेना चाहिये कि आय में यह बढ़ोतरी कम्पनी के वास्तविक कार्यकलापों के कारण हुई है या अन्य आय के द्वारा।

-शुद्ध मुनाफा (Net Profit) : यह वो रकम है जो करों को चुकाने के बाद कम्पनी के पास बचती है। हर निवेशक का वास्ता इस रकम से होता है। इस रकम का एक हिस्सा निवेशक को लाभांश के रूप मे मिलता है और शेष कम्पनी की पूंजी में जमा हो जाता है यानी इसे कम्पनी के विस्तार, उधार चुकाने अथवा दूसरी कम्पनियों का अधिग्रहण करने के लिये प्रयोग किया जा सकता है।

तो, अब आप समझ गए होंगे कि कंपनियों के नतीजों को नजरअंदाज करना आपके लिए कितना नुकसानदायी भी हो सकता है। इसलिए, आपके पास शेयर है, उसके हर तिमाही नतीजों पर तो नजर रखें ही, साथ ही जिस सेक्टर से आपके शेयर का ताल्लुकात है, उस सेक्टर के प्रदर्शन और उस सेक्टर की दूसरी कंपनियों के नतीजों पर ध्यान दें।

((शेयर बाजार के निवेशकों के लिए कंपनियों के नतीजे के मायने -भाग-1
कंपनियों के नतीजे को सिर्फ आंकड़ा ना समझें निवेशक-भाग-1
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