बाय/सेल/होल्ड/टार्गेट/स्टॉप लॉस क्या बला है...

एक अच्छे-खासे कॉलेज में इन्वेस्टमेंट लिट्रेसी पर आयोजित एक सेमीनार में जाने का मौका मिला। वहां जब मैंने मौजूद छात्रों से शेयर बाजार के  बारे में पूछा कि आप में से शेयर बाजार से कौन-कौन जुड़े हैं। ज्यादातर छात्र तो ना ही में जवाब दिया। उनमें से एक-दो छात्रों ने सिर्फ खबर जानने तक शेयर बाजार की जानकारी होने की बात बताई। दो में से एक छात्र ने मुझसे कुछ पूछने की इजाजत मांगी। मैनें उस छात्र को सवाल पूछने की अनुमति दे दी।

उसने पूछा सर, शेयर बाजार खुलने से पहले, एंकर और एक्सपर्ट लोग खास-खास शेयर के बारे में बाय-सेल-होल्ड-सपोर्ट-रजिस्टेंस-प्रॉफिट बुकिंग,एक्यूमुलेट जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उसके मायने क्या होते हैं। उसने आगे पूछा कि क्या सेल रिलायंस का मतलब, रिलायंस वाले उसे बेचने की बात करते हैं, क्या या फिर बाय हीरो मोटो कॉर्प का मतलब ये हुआ कि हीरो मोटोकॉर्प वाले उसे किसी से खरीदने की बात करते हैं...। शायद
शेयर बाजार से जो लोग अनजान हैं, उनको जरूरी इन शब्दों को लेकर उलझन होती होगी।

जब आप शेयर बाजार में कारोबार करने के लिए उतरते हैं तो आपको शेयर के मार्केट प्राइस के अलावा शुरुआती स्तर पर कई तकनीकी शब्दों का सामना करना पड़ेगा। इसमें शामिल शब्द हैं -बाय, सेल, होल्ड, टार्गेट,
स्टॉप लॉस, सपोर्ट, रेजिस्टेंस।

हालांकि शेयर बाजार बहुत सारे जटिल शब्दों का भंडार है लेकिन शेयर बाजार के जानकार और शेयर बाजार से जुड़े समाचार पत्र, न्यूज चैनल, ब्रोकरेज हाउस, वेबसाइट बगैरह इन तकनीकी शब्दों का धड़ल्ले से इस्तेमाल
करते हैं। इन शब्दों के इस्तेमाल अक्सर निवेशकों को ये बतलाने के लिए किए जाते हैं कि किसी खास समय (अगले घंटे में, दिनभर में, अगले सात दिनों में, अगले 15 दिनों में, अगले एक महीने या छह महीने या सालभर में या फिर 2-3 साल में या इससे अधिक अवधि में) में निवेशक किसी खास शेयर के बारे में क्या फैसला लें। इसे दूसरे शब्दों में एक्सपर्ट की राय या सलाह या रेकमंडेशन भी कहते हैं, यह शेयरों पर ब्रोकरेज की रिपोर्ट के नाम से भी जाता है।

निवेशकों के फैसलों में शामिल हो सकता है उसे खरीदें(बाय), उसे बेच दें (सेल), उसे और खरीदें (बाय/Accumulet) या उसे होल्ड रखें (निवेशित) रहें। तो आइए आप भी जानिए आखिर शेयर बाजार के जानकारों की सलाह या रेकमंडेशन या राय के क्या-क्या मायने  होते हैं...

-मार्केट प्राइस-एक मुक्त बाजार में किसी शेयर की खरीद या बिक्री के लिए प्रचलित भाव।

-बाय(Buy/ खरीदें) : अगर कोई एक्सपर्ट किसी शेयर के बारे में 'बाय' की सलाह दे रहा है, इसका मतलब हुआ कि आपको वो शेयर खरीदना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि ये सलाह हमेशा लागू नहीं हो सकती है। ये किसी खास समय के लिए लागू होती है। इसके तहत दो तरह के सलाह दिए जा सकते हैं। एक तो मौजूदा मार्केट भाव पर खरीदें और दूसरा खरीद की कीमत का दायरा या स्तर दिया जा सकता है। दूसरी सलाह में जब कोई शेयर एक्सपर्ट के बताए दायरे या स्तर के आसपास कारोबार करे, तभी शेयर खरीदें।

-सेल (Sell/बेचें): जब कोई एक्सपर्ट किसी शेयर के बारे में 'सेल' की सलाह दे रहा है, इसका मतलब हुआ कि आपको वो शेयर बेच देना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि ये सलाह हमेशा लागू नहीं हो सकती है। ये किसी खास समय के लिए लागू होती है। इसके तहत दो तरह के सलाह दिए जा सकते हैं। एक तो मौजूदा मार्केट भाव पर बेच दें और दूसरा बेचने के भाव का दायरा या स्तर दिया जा सकता है। दूसरी सलाह में जब कोई शेयर एक्सपर्ट के बताए दायरे या स्तर के आसपास कारोबार करे, तभी शेयर बेचें।


-होल्ड (Hold/निवेशित रहें): इसके तहत एक्सपर्ट किसी खास शेयर में, जो आपके पास पहले से है उसमें निवेशित रहने की सलाह देते हैं।

-प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफा वसूलें): अगर कोई एक्सपर्ट प्रॉफिट बुकिंग की सलाह दे रहा है, इसका मतलब हुआ कि आपके शेयर में अगर तेजी आई है तो उसे बेचकर मुनाफा कमा लें। क्योंकि हो सकता है आगे ये तेजी बरकरार ना रहे।

-स्टॉप लॉस (नुकसान सीमित करें): स्टॉप लॉस शेयर बाजार की खूबसूरती है। स्टॉप लॉस लगाकार आप अपने नुकसान को सीमित कर सकते हैं या फिर आप अपने हिसाब से नुकसान तय कर सकते हैं। स्टॉप लॉस एक तरह से जोखिम प्रबंधन का हथियार है।

शेयर बाजार भी एक तरह से कारोबार है और जिस तरह से कारोबार में नफा-नुकसान लगा रहता है, उसी तरह शेयर बाजार में भी नफा-नुकसान होता है। दूसरे कारोबार में तो आप अपने हिसाब से नुकसान की सीमा नहीं तय कर सकते हैं लेकिन शेयर बाजार में इसका फायदा उठा सकते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, शेयर बाजार के निवेशकों के स्टॉप लॉस कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

-सपोर्ट: किसी भी शेयर या इंडेक्स का सपोर्ट लेवल का मतलब हुआ कि उस लेवल से शेयर या इंडेक्स बाउंस बैक करेगा और उससे नीचे नहीं गिरेगा। एक्सपर्ट अक्सर तीन, चार या उससे भी अधिक सपोर्ट लेवल देते हैं। एक्सपर्ट अक्सर सपोर्ट लेवल के आसपास खरीदारी की सलाह देते हैं।

-रेजिस्टेंस: किसी भी शेयर या इंडेक्स का रेजिस्टेंस लेवल का मतलब हुआ कि उस लेवल से शेयर या इंडेक्स के ऊपर जाने की संभावना नहीं है। इस लेवल पर एक्सपर्ट मुनाफावसूली की सलाह देते हैं। एक्सपर्ट अक्सर तीन, चार या उससे भी अधिक रेजिस्टेंस  लेवल देते हैं।

शेयर बाजार में एंट्री करने पर शुरुआती स्तर पर इन शब्दों से आपका सामना होगा, लेकिन जैसे-जैसे आप इसमें आगे बढ़ते जाएंगे, दूसरे शब्दों को भी जानना -समझना जरूरी होगा।

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