फेसबुक, Fake फ्रेंड रिक्वेस्ट और फ्रॉड: सायबर धोखेबाजों से कैसे बचेंगे?

'किसी कस्टम अधिकारी के फोन पर तुरंत भरोसा ना करें' 
अगर आप फेसबुक पर हैं और किसी अनजान शख्स का फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करते हैं तो सावधान रहिएगा, हो सकता हैरिक्वेस्ट भेजने वाला आप से पैसे ऐंठने के चक्कर में हो, आपको सायबर फ्रॉड के जाल में फंसाना चाहता हो। जी हां, ऐसेकई मामले सामने आए हैं और हो सकता है सायबर धोखेबाजों का अगला निशाना आप ही हो।

फेसबुक जैसे सोशल मीडिया आम लोगों के लिए अगर उपयोगी है तो फ्रॉड करके पैसे ऐंठने वालों के लिए भी पनाहगार साबित हो रहा है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत ये होती है कि फर्जीवाड़ा करने वालों से पैसे की रिकवरी करना आसान नहीं होता है। जानकारों के मुताबिक, इस तरह से धोखाधड़ी वालों का ज्यादातर अकाउंट या तो नाइजीरिया में होता है या फिर किसी अफ्रीकी देश में। इसके अलावा IP एड्रेस का पता चल जाने के बाद भी आरोपी या आरोपियों का ठिकाना पता करना काफी मुश्किल होता है।

सायबर अपराधी कैसे देते हैं अंजाम: 
-धोखेबाज किसी को भी पहले यूं ही फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं
-वो अक्सर 30-35 साल के लोगों, जिनमे महिला और
पुरुष दोनों शामिल हैं,को निशाना बनाते हैं।
-धोखेबाज तबतक फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं जब तक
सामने वाला स्वीकार ना कर ले
-इसके बाद धोखेबाज फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करना वालों (पीड़ित)
से चैट करता है। चैट के दौरान उनको बताता है कि वह यूके का/की
कारोबारी है और वह कारोबारी यात्रा पर भारत जाने वाला/वाली है।
पीड़ित को वो ये भी बताता/बताती है कि वो पीड़ित के लिए एक महंगी
गिफ्ट साथ में ला रहा/रही है। धोखेबाज अपनी फ्लाइट्स डीटेल्स
भी बता देते हैं।
-बाद में पीड़ित को उस धोखेबाज के किसी भारतीय सहयोगी का कॉल
आता है जो खुद को कस्टम अधिकारी होने का दावा करता है। कस्टम
अधिकारी पीडि़त को बताता है कि फेसबुक फ्रेंड द्वारा महंगी गिफ्ट की
घोषणा नहीं करने से उसे एयरपोर्ट पर रोक लिया गया है और पीड़ित
द्वारा महंगी गिफ्ट की कस्टम ड्यूटी चुकाने के बाद ही उसे वो गिफ्ट
मिलेगा और उसका फेसबुक फ्रेंड रिहा किया जाएगा। ऐसा नहीं करने
पर पीड़ित को न्यायिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


> फंसने से खुदको कैसे बचाएंगे? 
-किसी अनजान शख्स के फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले कई बार सोचें।
बिना सोचे-समझें रिक्वेस्ट स्वीकार ना करें। कुछ समय रिक्वेस्ट भेजने वालों के प्रोफाइल
देखने और उसकी सत्यता जांचने में दें कि वो सही है या फिर फर्जी है। दोस्तों की मौजूदा
सूची से भी हो सके तो उसका मिलान करें।
-किसी भी इंशेटिव आधारित स्कीम या मौकों में नहीं फंसें
-जिस लेनदेन में पहले से ही प्रोसेसिंग फी जुड़ा हो उसे स्वीकार नहीं करें
-कंपनी और ऑफर के बारे में हां करने से पहले ई-मेल या किसी और
तरीके से उसकी सत्यता जांच लें
-किसी भी सोशल साइट पर अपनी पर्सनल जानकारी शेयर ना करें।
साथ ही साइट पर सेटिंग इस तरह से करें कि आपको जानने वाला
ही आपकी जानकारी तक पहुंच सके।
-अपने किसी दोस्त की सिफारिश को आंख बंद करके भरोसा ना करें। आप
किसी रिक्वेस्ट को केवल इसलिए ना स्वीकार कर लें कि उसके किसी वीडियो,
या दूसरी जानकारियों को आपके दोस्त ने शेयर किया है या फिर लाइक किया है।
ये फर्जी अकाउंट हो सकता है, किसी धोखेबाज या हैकर का भी अकाउंट हो
सकता है। आप स्तर से रिसर्च जरूर करें।
-रिक्वेस्ट भेजने वालों के व्याकरण को जरूर देखें। स्कैम करने वालों की अंग्रेजी में
कई गलतियां होती हैं।
-अपने दोस्तों को भी सावधान करें।
> जब फंस जाएं तो क्या करें?
-काफी सावधानी बरतने के बावजूद भी आप इन धोखेबाजों के जाल में फंस जाते हैं तो सबसे पहले तुरंत
नजदीकी सायबर थाने में FIR दर्ज कराएं। देरी होने पर धोखेबाजों को पकड़ना काफी मुश्किल हो जाता है।

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